ड्रिप सिंचाई व्यवस्था सिंचाई की एक उन्नत तकनीक है जो पानी की बचत करता है । इस विधि में पानी बूंद-बूंद करके पौधे या पेड़ की जड़ में सीधा पहुँचाया जाता है जिससे पौधे की जड़े पानी को धीरे-धीरे सोखते रहते है। इस विधि में पानी के साथ उर्वरको को भी सीधा पौध जड़ क्षेत्र में पहुँचाया जाता है जिसे फ्रटीगेसन कहते है । फ्रटीगेसन विधि से उर्वरक लगाने में कोई अतिरिक्त मानव श्रम का उपयोग नही होता है। अत% यह एक तकनीक है जिसकी मदद से कृषक पानी व श्रम की बचत तथा उर्वरक उपयोग दक्षता में सुधार कर सकता है।   टपक (Drip) सिंचाई पद्धति एक ऐसी विधि है, जिसमे फसल को जल मंद गति से बूँद-बूँद के रूप में जड़ क्षेत्र एक छोटी व्यास की प्लास्टिक पाइप से प्रदान की जाती है | सिंचाई की इस तकनीक का इस्तेमाल सर्वप्रथम इजराइल देश में किया गया | जिसके बाद वर्तमान समय में आज पूरी दुनिया के अनेक देशो में इस तकनीक का प्रयोग किया जा रहा है |
यह एक सिंचाई विधि है, जिसका इस्तेमाल दुनिया के कई देशो में बहुत तेजी के साथ देखा जा रहा है | इस विधि में पौधों की सिंचाई को टपक विधि द्वारा किया जाता है | जिसके लिए छोटी व्यास वाली प्लास्टिक की पाइप का इस्तेमाल किया जाता है | इस विधि में पौधों की जड़ो में जल को बूँद-बूँद के रूप में पहुंचाया जाता है, जिससे सतह वाष्पन एवं भूमि रिसाव से जल की हानि भी कम होती है, तथा पौधों को उवर्रक पहुचाने के लिए उवर्रक को घोल के रूप में इस्तेमाल किया जाता है | सिंचाई की यह तकनीक उन क्षेत्रों के लिए काफी उपयुक्त मानी जा रही है, जहाँ जल की कमी तथा जमीन असमतल और सिंचाई प्रक्रिया काफी खर्चीली होती है |
 

ड्रिप सिंचाई की जानकारी देने और उसके लाभों से अवगत करता आलेख किसानों के जनहित में जारी:
एग्रीकल्चर एक्सपर्ट का मानना है की परंपरागत खेती के तरीकों में भू गर्भ जल का 85 प्रतिशत बर्बाद हो जाता है। एक क्विंटल धान पैदा करने में ढाई लाख लीटर पानी खर्च होता है। किसान टपक सिंचाई पद्धति को अपनाकर पानी की बर्बादी रोक सकता है। टपक सिंचाई को बूंद बूंद सिंचाई या ड्रिप सिंचाई के नाम से भी जाना जाता है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में किसानों से एक सीधे संवाद में किसानों को खेती की लागत घटाकर उत्पादन बढ़ाने के टिप्स देते हुए कहा था कि सूक्ष्म सिंचाई पद्धति से खेती की लागत घटाकर उत्पादन बढ़ाते हुए फसलों में ज्यादा मुनाफा कमाया जा सकता है। पानी की कमी से जूझते किसानों की कृषि लागत घटाने के लिए प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत ड्रिप और स्प्रिंकलर विधि से सिंचाई को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे पानी की तो बचत होती ही है, सिंचाई का खर्च कम हो जाता है और किसान का लाभ भी बढ़ जाता है।


ड्रिप सिंचाई में उपयोगी उपकरण :

  • मोटर पंप – पानी की आपूर्ति के लिए
  • फ़िल्टर यूनिट – पानी को छानने में उपयोगी
  • फ्रटीगेशन यूनिट – पानी में खाद मिलाने की वयवस्था
  • प्रेशर गेज – पानी के दाब को मापने का यंत्र

ड्रिप सिंचाई के फायदे:

  • सबसे बड़ा फायेदा पानी की बचत होती है जिससे अतिरिक्त क्षेत्र को सिंचित किया जा सकता है। कम से कम 30 प्रतिशत पानी की बचत होती है। यानि की 30 प्रतिशत क्षेत्र की सिंचाई।
  • पुरे खेत में पानी का एक समान वितरण।
  • खेती करने के सभी तरीकों में ड्रिप सिंचाई व्यवस्था का इस्तेमाल किया जा सकता है। जैसे कि खुले खेत में खेती। व्यावसायिक ग्रीन हाउस में खेती। आवासीय उद्यानों। पॉलीहाउस खेती। शेड नेट फार्मिंग इत्यादि । सभी प्रकार की मृदाओं में सफलता पूर्वक सिंचाई।
  • क्योंकि सिमित क्षेत्र को गिला करता है। इसलिय फसल में खरपतवारों का प्रकोप बहुत कम होता है।
  • उर्वरकों एवं पोषक तत्वों का ह्रास कम होता है। जिससे उनकी उपयोग दक्षता बड जाती है ।  साथ ही भूमिगत जल। खुला वातावरण एवं अन्य वस्तुओं में उर्वरकों एवं पोषक तत्वों द्वारा प्रदुषण की सम्भावना बहुत कम हो जाती है।
  • मिटटी के कटाव की सम्भावना नगण्य हो जाती है ।
  • दूसरी सिंचाई तरीको की तुलना में मानव श्रम का कम उपयोग होता है। जिससे किसान को आराम मिलता है।
  • फसल में सूक्ष्म पोषक तत्वों को कम से कम क्षति पहुंचाए फर्टीगेशन (ड्रिप व्यवस्था के साथ खाद को सिंचाई वाले पानी के साथ प्रवाहित करना) किया जा सकता है।
  • ड्रिप सिंचाई खेती करने पर किसानों को सब्सिडी मिलती है। सब्सिडी दर अलग अलग राज्यों में अलग अलग है।
     

ड्रिप और स्प्रिंकलर सब्सिडी योजना  2022(Drip Irrigation Subsidy Yojana  2022):

ड्रिप सिंचाई सब्सिडी ऑनलाइन फॉर्म:- हमारा भारत देश एक कृषि प्रधान देश है यंहा बहुत ज्यादा लोग खेती करके ही अपना गुजारा करते हैं  साथ ही देश में कमाई का ज्यादातर बड़ा हिस्सा किसानों के जरिए ही आता है लेकिन आज किसानो को बहुत ज्यादा समस्या है एक मौसम के कारण फसले खराब होती है दूसरा इतने अच्छे उपकरण और तकनीक नही जिस से अच्छी खेती की जा सके ऐसे में केंद्र और राज्य सरकार द्वारा बहुत सी योजना चलाई गयी है

  • लॉन्च कि तारीक :   वर्ष 2015
  • लाभार्थी :   देश के किसान
  • ऑफिसियल वेबसाइट:    http://pmksy.gov.in/