यूरोप, पश्चिमी एशिया, लेटिन अमरीका और अमरीका में इसका इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। नई तकनीकों और उपकरणों के इस्तेमाल के चलते इसमें शुरुआती लागत तो ज्यादा आती है, पर लंबे समय में खेती की लागत काफी घट जाती है।

कृषि क्षेत्र में बढ़ती समस्याओं और अनिश्चितताओं के बीच डिजिटल खेती को एक बेहतर विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है। खर्चीला होने के बावजूद भारत सहित कई एशियाई देशों में इसकी ओर किसानों का रुझान बढ़ रहा है। कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, गोवा, गुजरात जैसे राज्यों में कई प्रगतिशील किसान डिजिटल खेती कर रहे हैं। रोबोट, ड्रोन,जीपीएस प्रणाली आदि के प्रयोग से कई देश स्मार्ट खेती को बढ़ावा दे रहे हैं।

डिजिटल खेती में बुवाई से लेकर कटाई तक की प्रक्रिया को बढ़ावा देने सहित लगभग हर जानकारियां शामिल हैं। हाल ही में एक शोध रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक स्मार्ट खेती बाजार के 2022 तक 1.64 लाख करोड़ रुपए के आंकड़े को छूने की उम्मीद है। इतना ही नहीं 2017 से 2022 तक लगभग 20 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर भी देखी जा रही है।

क्या है डिजिटल खेती

डिजिटल खेती में स्वत: काम करने वाले यंत्र, ड्रोन, जीपीएस और आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) जैसी तकनीकों की मदद से खेती की जाती है। यूरोप, पश्चिमी एशिया, लेटिन अमरीका और अमरीका में इसका इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। नई तकनीकों और उपकरणों के इस्तेमाल के चलते इसमें शुरुआती लागत तो ज्यादा आती है, पर लंबे समय में खेती की लागत काफी घट जाती है।

 

क्यों है इसकी जरूरत

कृषि में प्रौद्योगिकी और डिजिटलीकरण के लाभ अनुमान से अधिक हैं। इससे मिट्टी की घटती उर्वरता और खादों व कीटनाशकों के बेजा इस्तेमाल जैसी समस्याओं से निजात मिल सकती है। संसाधनों की भी बचत होती है। खेती का तकनीक आधारित प्रबंधन ने किसानों का समय बचाने व खेती की अनिश्चितताओं को भी कम किया है।

क्या है मौजूदा समस्या

जलवायु परिवर्तन और आबादी का बढ़ता आंकड़ा मौजूदा कृषि के लिए बड़ी समस्या है। किसान अब भी पुराने तरीके से खेती कर रहे हैं। जिससे उन्हें परिस्थितियों के अनुकूल प्रयोगों के बारे में जानकारी नहीं हो पाती है। आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024 तक कृषि ड्रोन का बाजार 70.99 हजार करोड़ रुपए तक पहुंच सकता है। इी तरह अकेले अमरीका में ही स्मार्ट खेती पर अंदाजन 05.82 लाख करोड़ रुपए 2015-25 तक खर्च किए जाएंगे।

खेती में आईटी के क्या हैं फायदे

  • फसलों को रोपने और बीजाई करने के बारे में नयी तकनीकों के बारे में जानकारी मुहैया कराना।
  • एग्रो-क्लाइमेटिक यानी खेती के लिए अनुकूल मौसम आधारित अध्ययन के जरिए जरूरी सूचना देना।
  • सभी फसलों के बारे में अलग-अलग तौर पर उनकी मांग और आपूर्ति की जानकारी देना, ताकि ज़्यादा मांग और कम आपूर्ति वाली फसलों के उत्पादन पर वे ज्यादा ज़ोर दे सकें।
  • फसल से जुड़े, रोपण, बीज शोधन, कटाई आदि के बारे में जानकारी देना।
  • किस मूल्य पर किस बाजार में फसलों को बेचा जाए, इस बारे में समुचित सूचना मिलती है।
  • जिन किसानों को ठीक से पढ़ना नहीं आता वे भी वीडियो को देखकर और सुनकर खेती के बारे में जानकारी ले लेते हैं।
  • किसानों के लिए कई ऐप्स हैं जिनसे खेती से जुड़ी हर जानकारी चुटकियों में मिल जाती है।
  • समय व पैसों की बचत।

सरकार ने आईटी के ज़रिए शुरू की कई योजनाएं

किसान कॉल सेंन्टर

सरकार ने किसान कॉल सेंटर की शुरुआत ऐसे किसानों को ध्यान में रखकर की जो सूदूरवर्ती गाँव में रहते है और वहीं बैठे खेती से संबंधित जानकारी चाहते हैं - जैसे- कृषि उत्पादकता कैसे बढ़े, उन्नत खेती के तरीके और उससे लाभ कैसे मिले। किसान कॉल सेन्टर के माध्यम से मुफ्त फोन सेवा (18001801551) व मैसेज से जानकारी उपलब्ध कराई जाती है। जैसे किसानों की समस्याएं, मौसम से संबधित जानकारी स्थानीय भाषा में नियमित रूप से दी जाती है।

ई चौपाल
ई चौपाल को किसानों को दलालों और विचैलियों से बचाने के लिए शुरू किया गया। इसमें कृषि संयत्र, मौसम, फसल, कृषि उत्पादों की खरीद ब्रिकी, इंटरनेंट के ज़रिए किसानों को सीधे जोड़ा जाता है और उससे संबंधित सूचना दी जाती है। ई चैपाल से किसान अपनी उपज ऑनलाइन मंडी के द्वारा उच्च लागत से बेचते है जिससे उनको शुद्ध मुनाफा मिलता है ICT द्वारा किसानों को उनके उत्पादों की गुणवता में सुधार करने में मदद करता है। ई0 चैपाल सेवा शुरू होने के बाद से किसानों के उत्पादन की गुणवता तथा पैदावार में वृद्धि सुधार की वजह से उनके आय के स्तर में वृद्धि, और लेन देन में गिरावट आयी है।

किसान चौपाल
किसान चौपाल को कृषि विज्ञान केन्द्र (KVK) चलाता है। कृषि वैज्ञानिक किसानों की जरूरत को आंकलन के आधार पर किसान चौपाल गाँव में आयोजित की जाती है। किसान चैपाल में किसानों के खेती, फसल उत्पादन, पशुपालन एवं इससे संबधित समस्याओं को सुना जाता है और वीडियो, पावर प्वाइंट प्रजंटेशन, ऑडियो के ज़रिए उन्हें सुलझाया जाता है।

ग्रामीण ज्ञान केन्द्र
ग्रामीण ज्ञान केन्द्र, कृषि क्षेत्र में उपलब्ध जानकारी को किसान तक पहुंचाने, फसल उत्पादन से विपणन के लिए शुरू कर सूचना के प्रसार केन्द्र के रूप में कार्य करता है। जिसके माध्यम से कृषि, बागवानी, मत्स्य, पशुधन, जल संसाधन, टेली स्वास्थ, जागरूकता कार्यक्रम, महिला सशक्तिकरण, कंप्यूटर शिक्षा तथा आजीविका सहायता के लिए कौशल विकास / व्यवसायिक प्रशिक्षण दिया जाता है।

किसान क्रेडिट कार्ड
यह योजना भारत सरकार, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) ने शुरू की है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों को समय पर ऋण उपलब्ध कराना है। वैसे किसान जिन्हें बार-बार कर्ज़ के लिए बैंकों के पास जाना पड़ता था, और बार- बार बैंकिग प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था जिससे किसानों को जरूरत के समय कर्ज़ नहीं मिल पाता था। किसान क्रेडिट कार्ड से ऋण किसानों को समय से मिल जाता है और खेती में नुकसान होने पर रकम अदायगी के लिए अवधि में असानी से बदला जा सकता है, जिससे किसानों को अधिक परेशानी भी नहीं होती है और अतिरिक्त बोझ भी नही पड़ता है।